May 26, 2026

गंगा दशहरा पर श्रमदान की मिसाल, मेहराब साहब की तलैया में दिखी जनभागीदारी की ताकत

ग्वालियर। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर ग्वालियर की ऐतिहासिक मेहराब साहब की तलैया पर जनसहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन का अद्भुत संगम देखने को मिला। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत आयोजित सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों ने एक साथ श्रमदान कर जल संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।

सांसद भारत सिंह कुशवाह की अगुआई और कलेक्टर रुचिका चौहान की प्रेरणादायक मौजूदगी में लक्ष्मीगंज स्थित तलैया परिसर में लोगों ने फावड़ा, तसला और कुदाल उठाकर सफाई अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा शहर जल संरक्षण के संकल्प के साथ एकजुट हो गया हो।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने खुद संभाली जिम्मेदारी

कार्यक्रम में सांसद भारत सिंह कुशवाह, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, जीडीए उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया, अनिल सांखला, धर्मेंद्र तोमर ‘बिट्टू’, राजू पलैया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं पार्षद शामिल हुए। सभी ने मैदान में उतरकर श्रमदान किया और लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

वहीं प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, जिला पंचायत सीईओ सोजन सिंह रावत, अपर आयुक्त मनोज तोमर, अपर आयुक्त मुनीश सिकरवार, एसडीएम नरेन्द्र बाबू यादव एवं नरेश चंद्र गुप्ता सहित अनेक अधिकारियों ने भी श्रमदान कर समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।

एक बस में पहुंचकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम की एक खास बात यह भी रही कि कलेक्टर रुचिका चौहान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी अपने निजी वाहनों की बजाय एक ही बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इससे ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अधिकारी उसी बस से वापस लौटे। कलेक्टर स्वयं आमजन की तरह बस से अपने घर तक पहुंचीं, जिसने लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा का विषय बना।

जल संरक्षण के लिए जागरूकता का बना बड़ा मंच

मेहराब साहब की तलैया पर हुआ यह सामूहिक श्रमदान केवल सफाई अभियान नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल धरोहरों को सहेजने का संकल्प भी था। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब शासन और समाज साथ आते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।

यह आयोजन न केवल जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि समाज में सहभागिता, एकजुटता और पर्यावरण चेतना को भी नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ।