29 मार्च को रखा जाएगा व्रत, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ संतान प्राप्ति के लिए विशेष महत्व*
नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह की कामदा एकादशी इस वर्ष 29 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करने पर व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
खास बातें
29 मार्च 2026 को रखा जाएगा कामदा एकादशी व्रत
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान
व्रत रखने से पापों से मुक्ति और सौभाग्य में वृद्धि
संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ संतान प्राप्ति के लिए बेहद फलदायी
अन्न, धन और वस्त्र का दान करने का भी विशेष महत्व
कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कामदा एकादशी व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी बताया गया है जो जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
संतान गोपाल स्तोत्र का विशेष महत्व
कामदा एकादशी के दिन संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह स्तोत्र विशेष फलदायी होता है। नियमित रूप से इसका पाठ करने से संतान से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में खुशियों का आगमन होता है।
पूजा विधि और उपाय
कामदा एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु के समक्ष दीप, धूप, फल और तुलसी अर्पित करें। इसके बाद संतान गोपाल स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। साथ ही दिनभर सात्विक आचरण और भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए।
कामदा एकादशी का व्रत आध्यात्मिक और पारिवारिक सुख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। विशेष रूप से संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ अत्यंत लाभकारी बताया गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
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