October 30, 2026

21वें आईटीएम उद्भव उत्सव में नृत्य के जरिए जीवंत हुई राधा-कृष्ण की रासलीला और शिव का रौद्र रूप

एकल और समूह नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, भगवान जगन्नाथ की स्तुति से भक्तिमय हुआ वातावरण

ग्वालियर। 21वें आईटीएम उद्भव उत्सव इंटरनेशनल कल्चरल ओलंपियाड 2026 के अंतिम दिन एकल और समूह नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध नृत्य के माध्यम से राधा-कृष्ण की रासलीला, हनुमान की रामभक्ति, भगवान शिव के रौद्र स्वरूप और भगवान जगन्नाथ की स्तुति को मंच पर सजीव कर दिया। शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और पौराणिक प्रसंगों की सुंदर झलक देखने को मिली।

आईटीएम यूनिवर्सिटी, तुरारी में सुबह 10 बजे से एकल नृत्य की फाइनल प्रतियोगिता आयोजित की गई। वहीं, शाम को सिथौली स्थित आईटीएम परिसर के खुले मंच ‘नाद’ पर रंग-बिरंगी रोशनी के बीच समूह नृत्य की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक उत्सव में चार चांद लगा दिए।

नृत्य में दिखी भक्ति, भाव और भारतीय संस्कृति की झलक

एकल नृत्य प्रतियोगिता में देश के विभिन्न शहरों से आए प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। गुरुग्राम की आयशा खट्टर ने फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ के प्रसिद्ध गीत ‘जब प्यार किया तो डरना क्या’ पर आकर्षक प्रस्तुति दी, जबकि ग्वालियर की वाणी पाठक ने ‘ठाढ़े रहियो ओ बांके यार’ पर नृत्य कर दर्शकों को प्रभावित किया।

गुरुग्राम के अर्नव अजाना ने ‘डिवाइन पावर’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जरिए अपनी भाव-भंगिमाओं और लयबद्धता का प्रदर्शन किया।

सोनीपत के सप्त ऋषि टीवी ने नटराज नृत्य से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गुवाहाटी की रेनाइस्ता जैन ने राधा-कृष्ण की रासलीला को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया, जबकि गुरुग्राम की गिरिका नागपाल ने भगवान कृष्ण के नटखट स्वरूप से लेकर योद्धा के रूप तक की यात्रा को नृत्य के माध्यम से मंच पर उतारा।

इंदौर की स्वर्णिम नेमा ने कृष्ण-अर्जुन संवाद को नृत्य-अभिनय के जरिए जीवंत किया। गुरुग्राम की सोफिया बुरतों ने शिव महिमा पर आधारित प्रस्तुति दी, वहीं ग्वालियर की फाल्गुनी कसेरा ने शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों की सराहना हासिल की। स्वस्ति सोमानी ने कबीर के भजन ‘चदरिया झीनी रे झीनी’ पर नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सैन अग्रवाल ने ‘बरसो रे मेघा मेघा’ के जरिए वर्षा और प्रकृति के सौंदर्य को मंच पर साकार किया।

समूह नृत्य में शास्त्रीय कला की मनमोहक प्रस्तुतियां

शाम को आयोजित समूह नृत्य प्रतियोगिता की शुरुआत कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन के कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ की स्तुति से की। इसके बाद इंदौर के डेली कॉलेज के कलाकारों ने भरतनाट्यम प्रस्तुत किया। दिल्ली पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने मेघनाद प्रसंग को नृत्य के माध्यम से दर्शाया, जबकि सिंधिया कन्या विद्यालय, ग्वालियर की छात्राओं ने ‘नटनम’ की प्रस्तुति दी।

ओपन क्लासिकल डांस श्रेणी में इंदौर की आयाम कथक अकादमी ने शिव वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद कल्पार्पण डांस एकेडमी और स्वर्णा डांस एकेडमी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के समापन पर ए.के.एस. एकेडमी की कथक प्रस्तुति को भी खूब सराहना मिली।

संस्कृति और कला से मजबूत होता है वैश्विक संवाद

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम अपनी पत्नी श्रीमती शशि त्रिपाठी के साथ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. नलिनी-कमलिनी ने की। विशेष अतिथियों में सिंधिया कन्या विद्यालय की प्राचार्य निशि मिश्रा, आईटीएम यूनिवर्सिटी के उपकुलपति योगेश उपाध्याय, उद्भव के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय और सचिव दीपक तोमर शामिल रहे।

स्वागत भाषण में डॉ. केशव पांडेय ने उद्भव की 30 वर्षों की यात्रा और ग्वालियर को म्यूजिक सिटी का दर्जा दिलाने में किए गए प्रयासों की जानकारी दी।

एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सैनिक और कलाकार, दोनों के जीवन में अनुशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्भव उत्सव ने समर्पण और मेहनत के बल पर 21वें वर्ष में प्रवेश किया है। उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में यह आयोजन विश्व के विभिन्न हिस्सों तक अपनी पहचान बनाएगा।

उन्होंने कहा कि कला की कोई भाषा नहीं होती। संगीत अपनी शैली से भाव व्यक्त करता है, जबकि नृत्य में चेहरे के हाव-भाव ही बहुत कुछ कह देते हैं। उन्होंने युवाओं को संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने की प्रेरणा दी और मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) जैसी पहलों को वैश्विक मुद्दों पर समझ विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया।

एडमिरल त्रिपाठी ने ग्वालियर की संगीत विरासत, मियां तानसेन और ध्रुपद परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त माध्यम हैं। भारतीय संस्कृति की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देती है और विभिन्न देशों तथा संस्कृतियों के बीच आपसी समझ को मजबूत करती है।

अनुशासन और गुरु के मार्गदर्शन से निखरती है प्रतिभा

पद्मश्री डॉ. नलिनी-कमलिनी ने कहा कि कलाकार और सैनिक, दोनों अनुशासन के प्रति समर्पित होते हैं। जिस तरह पत्थर को मूर्ति बनने के लिए चोट सहनी पड़ती है, उसी तरह कलाकार और सैनिक कठिन प्रशिक्षण तथा अनुशासन से निखरते हैं। गुरु अपने शिष्यों को तराशकर उनकी प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।

उन्होंने कलाकारों के निरंतर अभ्यास, समर्पण और गुरु के मार्गदर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला।

विभिन्न आयु वर्गों के प्रतिभागियों ने दिखाया हुनर

उद्भव उत्सव 2026 की एकल नृत्य प्रतियोगिता में 5 से 12 वर्ष आयु वर्ग के आठ, 12 से 18 वर्ष वर्ग के 12 और 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पांच प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सेमी-क्लासिकल श्रेणी में 5 से 12 वर्ष आयु वर्ग के पांच, 12 से 18 वर्ष वर्ग के 17 और 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के चार प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम का संचालन समीक्षा दुबे और डॉ. मनीषा गिरी ने किया। अंत में प्रवीण शर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

निर्णायक मंडल में कोलकाता की प्रोफेसर देवजानी चटर्जी, अनु मिश्रा, वाणी माधव, बालकृष्ण मरार, धीरज कुमार पांडेय और लावण्या आप्टे शामिल रहे।

इस तरह 21वें आईटीएम उद्भव उत्सव का अंतिम दिन भारतीय शास्त्रीय नृत्य, भक्ति, सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय संवाद के नाम रहा। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से रूबरू कराया।