ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल मिलावट के लिए बदनाम इस क्षेत्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले लगातार बुलंद बने हुए हैं। आरोप है कि विभागीय उदासीनता और कथित सांठगांठ के चलते मिलावट का कारोबार बेखौफ जारी है।
त्योहारों तक सीमित सैंपलिंग
जानकारी के अनुसार, खाद्य विभाग द्वारा होली और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के आसपास ही सैंपलिंग अभियान तेज किया जाता है, जबकि सालभर नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई का अभाव देखने को मिलता है। इससे मिलावटखोरों पर अपेक्षित दबाव नहीं बन पा रहा।
करोड़ों का जुर्माना, वसूली नगण्य
पिछले पाँच वर्षों में मिलावट के मामलों में करीब 3.75 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन वसूली बेहद कम—करीब 9 लाख रुपये—ही हो सकी है। आंकड़ों के मुताबिक अभी भी लगभग 3.66 करोड़ रुपये की वसूली लंबित है, जो विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है।
अधिकारियों की जमी पकड़ पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि पुलिस और अन्य विभागों की तरह यहाँ भी कई अधिकारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिससे कार्रवाई की धार कमजोर पड़ रही है। जिला प्रशासन के अधिकारी भी मानते हैं कि फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई में सुधार की जरूरत है।
दूध और दुग्ध उत्पादों में ज्यादा शिकायतें
ग्वालियर-चंबल अंचल दूध और इससे बने उत्पादों में मिलावट के लिए कुख्यात रहा है। यहाँ से दूध, दही, पनीर और मावा बड़े पैमाने पर अन्य शहरों में भेजा जाता है। सैंपलिंग के दौरान कई नमूने फेल भी होते हैं और विनिष्टीकरण (डिस्ट्रॉय) की कार्रवाई होती है, लेकिन जुर्माने की प्रभावी वसूली नहीं होने से मिलावटखोरों पर खास असर नहीं पड़ रहा।
प्रशासन ने दिए सुधार के संकेत
जिला प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने और अधिक से अधिक जुर्माने की वसूली हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर सख्ती कब दिखेगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
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