शिवपुरी। ओबीसी महासभा के नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मनीराम लोधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर आज प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर समिति सदस्य एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाह ने पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 13 सितंबर 2025 को जिला पंचायत क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत नांद (जिला शिवपुरी) स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्कूल समय में छात्र-छात्राएं बाहर खेलते मिले, जबकि कोई शिक्षक मौजूद नहीं था और चपरासी चबूतरे पर सोता पाया गया। बच्चों से पूछने पर उन्होंने बताया कि शिक्षकों के निर्देश पर वे बाहर खेल रहे हैं।
कुछ देर बाद शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक अनिल गुप्ता मौके पर पहुंचे। टाइम टेबल को लेकर पूछे जाने पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। विद्यालय में साफ-सफाई की स्थिति भी खराब पाई गई। निरीक्षण के दौरान कक्षाओं में कंबाइंड क्लास, अवकाश रजिस्टर में अनियमितताएं तथा शिक्षण व्यवस्था में कई कमियां सामने आईं।
शिक्षकों द्वारा दुर्व्यवहार का आरोप
ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एडवोकेट विश्वजीत रतौनिया ने बताया कि निरीक्षण के दौरान शिक्षकों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हुए बाद में मनीराम लोधी एवं उनके साथियों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज करा दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई शिक्षकों की सहमति से, गांव के लोगों एवं स्टाफ की मौजूदगी में हुई, जिसका वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध है।
जांच न होने पर उठे सवाल
एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाह ने कहा कि इस मामले को लेकर एसडीओपी, एसडीएम, कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत सीईओ, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मंत्री एवं पंचायत मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार किया गया, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते अब तक किसी भी स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुजन समाज की आवाज उठाने के कारण मनीराम लोधी को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे मामले में फंसाया गया है।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
ओबीसी महासभा के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि मनीराम लोधी के खिलाफ दर्ज झूठी एफआईआर के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी गई है, ताकि न्यायालय से एफआईआर निरस्त कराई जा सके। प्रेस वार्ता के माध्यम से ओबीसी महासभा ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।
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